Pocket Quarters

आपका ऑफ़िस, ब्राउज़र में।

घूमिए। कमरों में बात कीजिए। मुफ़्त।

  1. 1ऑफ़िस बनाएँ
  2. 2लिंक शेयर करें
  3. 3अंदर आएँ और बात करें

🔒 WebRTC से आपके ब्राउज़र सीधे आपस में जुड़ते हैं। आवाज़, वीडियो, फ़ाइलें और चैट एन्क्रिप्ट होकर यूज़र से यूज़र तक जाती हैं, हमारे सर्वर से होकर नहीं। अकाउंट का डेटा हम सिर्फ़ अकाउंट और ऑफ़िस बनाने के लिए लेते हैं।

🛡 दूसरे जो भी भेजें, आपका ब्राउज़र उसे चलाता नहीं है।

अंदर की बात

आपके ब्राउज़र सीधे एक-दूसरे से बात करते हैं

Pocket Quarters WebRTC इस्तेमाल करता है — सीधे कनेक्शन की वह तकनीक जो हर आधुनिक ब्राउज़र में पहले से मौजूद है। आप जो कहते, दिखाते और शेयर करते हैं, वह यूज़र से यूज़र तक जाता है, हमसे होकर नहीं।

  1. दो ब्राउज़र, एक ऑफ़िस

    सब एक ही लिंक खोलते हैं। बस इतना ही चाहिए: न कोई प्रोग्राम, न इंस्टॉल।

  2. हम सिर्फ़ परिचय कराते हैं

    हमारा सर्वर ब्राउज़रों को बताता है कि ऑफ़िस में कौन है और वे एक-दूसरे तक कैसे पहुँचें। आपकी बातचीत के लिए वह बस इतना ही करता है।

  3. फिर सीधी लाइन जुड़ जाती है

    ब्राउज़र WebRTC के ज़रिए सीधे एक-दूसरे से जुड़ते हैं। यहाँ से आगे आपके कंटेंट के बीच हमारा सर्वर नहीं रहता।

  4. कंटेंट यूज़र से यूज़र तक जाता है

    आवाज़, कैमरा, स्क्रीन, फ़ाइलें, चैट और व्हाइटबोर्ड इसी लाइन से एन्क्रिप्ट होकर चलते हैं। हम इन्हें न सुन सकते हैं, न सेव कर सकते हैं। और दूसरे जो भी भेजें, आपका ब्राउज़र उसे चलाता नहीं है।

  5. हमारे पास सिर्फ़ ज़रूरी चीज़ें रहती हैं

    अकाउंट का डेटा हम वहीं लेते हैं जहाँ ज़रूरत है: अकाउंट के लिए और ऑफ़िस बनाने के लिए — ईमेल, पासवर्ड हैश, फ़्लोर प्लान। जो बस लिंक से मिलने आए, उसे अकाउंट की ज़रूरत नहीं।

आप यहाँ क्या करते हैं

एक ऑफ़िस जहाँ चलते-फिरते मुलाक़ात हो जाती है

पहले लिंक से लेकर गलियारे के पार आवाज़ लगाने तक: ज़रूरी बातें पाँच चरणों में।

  1. अपना ऑफ़िस बनाइए

    ईमेल और पासवर्ड से अकाउंट, ऑफ़िस का नाम, फिर लिंक शेयर कीजिए। जो बस मिलने आए, उसे अकाउंट की ज़रूरत नहीं।

  2. अपने हिसाब से सजाइए

    कमरे बनाइए, दरवाज़े लगाइए, तय कीजिए कि आवाज़ कितनी दूर जाए। साथ में दरवाज़े के नियम: पासवर्ड, दस्तक, खुलने का समय, गेस्ट पास, नाम सूची।

  3. पास जाइए और बात शुरू

    हर कोई फ़्लोर प्लान पर एक किरदार है। गलियारे में जो पास खड़ा है वही आपको सुनता है; कमरे में सब एक-दूसरे को सुनते हैं। न मीटिंग तय करनी, न डायल-इन।

  4. मिलकर काम कीजिए

    कमरे में आवाज़, कैमरा, स्क्रीन, चैट और व्हाइटबोर्ड — और फ़ाइलें सीधे ब्राउज़र से ब्राउज़र।

  5. और थोड़ी मस्ती भी

    दो लोगों की फुसफुसाहट, पूरे गलियारे में पुकार, एक-दूसरे से टकराना या रास्ता रोकना — अगर आप अपने ऑफ़िस के लिए इसे चालू करें।